शुक्रवार, 24 मई 2024

उष्मगतिकी का नियम

 ऊष्मागतिकी : परिचय एवं सिद्धान्त


ऊष्मागतिकी को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है-

"विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत ऊर्जा तथा उसके रूपान्तरण का अध्ययन किया जाता है, ऊष्मागतिकी कहलाता है |

अगर इसका दूसरा परिभाषा देखें तो…

ऊष्मागतिकी के अंतर्गत हम ऊष्मा तथा कार्य के बीच के सम्बन्ध का अध्ययन भौतिक निकायों के साथ करते हैं। 

ऊष्मागतिकी के अंतर्गत हम सामान्यतः गैसों तथा वाष्पों की ऊर्जा का अध्ययन करते हैं। इसमें हम ऊर्जा का रूपान्तरण, ऊर्जा द्वारा निकायों पर किए गए कार्य, निकायों के गुण तथा अन्य तथ्यों का वर्णन करेगें।

ऊष्मागतिकी सामान्यतः चार नियमों पर आधारित है। जो निम्नलिखित हैं-


ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम:   तापीय साम्यता पर आधारित है तथा तापमान के बीच संबंध स्थापित करता है|


ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम :   यह आंतरिक ऊर्जा पर आधारित है।


ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम: यह सम्पूर्ण ऊष्मा के कार्य में परिवर्तन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा बढ़ते एण्ट्रापी के सिद्धान्त पर आधारित है।


ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम : यह निरपेक्ष शून्य एण्ट्रापी पर आधारित है। इस नियम के अनुसार, "किसी पदार्थ का परम शून्य तापक्रम" पर एन्ट्रापी शून्य होती है। यह नियम संभव नही होता है।



यह चारों नियम प्रयोगात्मक परीक्षणों पर आधारित हैं, इनका कोई गणितीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। यह चारों नियम तर्कपूर्ण होते हैं।



ऊष्मागतिकी ग्रीक शब्द से लिया गया है। ऊष्मागतिकी का प्रथम सैद्धान्तिक उपयोग 1650 ई० में आटो वेन गुर्के (Otto Von Guericke) द्वारा किया था जब उन्होंने दुनिया का पहला निर्वात पम्प स्थापित किया था।



ऊष्मागतिकी के जनक के रूप में साडी कारनॉट (Sadi Carnot) को माना जाता है जिनकी 1824 में ऊष्मागतिकी पर प्रकाशित पुस्तक, ऊष्मागतिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुई। इस क्षेत्र में कुछ अन्य नाम प्रमुख हैं, जिनका योगदान उल्लेखनीय है-  
 विलियम रैकिंन, रूडोल्फ क्लासियस, विलियम थामसन, जेम्स डार्क, मैक्सवेल, बोल्टजमैन, फ्लैंकस, विलियर्ड गिब्स आदि।





ऊष्मागतिकी का वर्गीकरण :    

अध्ययन की दृष्टि से ऊष्मागतिकी को दो वर्गों में वगीकृत किया गया है-

(i) क्लासिकल ऊष्मागतिकी (Classical thermodynamics)

(ii) सांख्यिकीय ऊष्मागतिकी (Statistical thermodynamics)



(i) क्लासिकल ऊष्मागतिकी:  इस ऊष्मागतिकी में निकाय के द्रव्य के गुणों में परिवर्तन का अध्ययन मैक्रोस्कोपिक दृष्टि से करते हैं। मैक्रोस्क्रोपिक दृष्टि से तात्पर्य निकाय के सम्पूर्ण द्रव्यमान को एक मानते हुए उस पर परिवर्तनों का अध्ययन करना होता है। मैक्रोस्कोपिक का शाब्दिक अर्थ है बड़ा या कुल। कुछ प्रमुख मैक्रोस्कोपिक गुण निम्नलिखित हैं-

तापमान, आंतरिक ऊर्जा, दाब, एण्ट्रापी आदि।





(ii) सांख्यिकीय ऊष्मागतिकी इस ऊष्मागतिकी में निकाय के द्रव्य के गुणो में परिवर्तन का अध्ययन माइक्रोस्कोपिक दृष्टि से करते हैं। माइक्रोस्कोपिक दृष्टि से तात्पर्य द्रव्य के प्रत्येक अणु एवं परमाणुओं के गुणो में होने वाले परिवर्तन का अध्ययन किया जाए। माइक्रोस्कोपिक का शाब्दिक अर्थ है छोटा। कुछ प्रमुख माइक्रोस्कोपिक गुण हैं, वेग, संवेग, गतिज ऊर्जा आदि।








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